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charwaha-or-rakshas : चरवाहा और राक्षस

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एक गांव मे एक चरवाहा रहता था,उसके पास 100 बकरिया थी, सभी बकरिया काली और भूरे रंग की थी, ओर एक भैस थी उन बकरियो ओर भैस क़ो चराने के लिए उस चरवाहे नें अपने घर एक नौकर रखा था, जिसका नाम था.........कौशल क्युकि वह खुद किसी अन्य काम के लिए शहर जाता था,और वहां बकरियो क़ो मोल भाव भी कर आता था, एक दिन ज़ब वापस लौट कर नौकर नें उन 100 बकरियो की गिनती की तो उनमे से एक बकरिया कम थी, वह डर गया, क्युकि मालिक अब उसकी अच्छी खबर लेने वाला था, मालिक आकर अपने काम मे ब्यस्त हो गया, जिसकारण उसे पता नहीँ चला की एक बकरी कम है, उसे लगा उसके नौकर नें हर दिन की तरह आज भी सभी बकरियो क़ो चरा कर वापस ले आया है, अगले शाम ज़ब कौशल बकरिया चरा कर वापस ले कर आया ,,,तो उसने गिनती की तो आज फिर एक बकरी कम थी..... कुल मिलाकर उसके पास अब 98 बकरी हीं बची थी........ कुछ दिनों से मालिक की ब्यस्तता के कारन वह बकरी गिनने की जद्दों जेहद नहीँ करता,जिस कारन कौशल के बारे मे उसे कुछ पता नहीँ चला की उसने बकरिया भुला दी, फिर से एक बकरी कम होने पर कौशल वापस जंगल चला गया,,,,और वहां खोयी बकरियो क़ो ढूंढने लगा, लेकिन उसे कोई भी बकरी न...

Nalayak-bete-ki-kahani : नालायक बेटे और पिता की कहानी

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ब्यापारी पिता और बेटे की कहानी :- एक बुजुर्ग दंपत्ति अपने इकलौते बेटे के साथ शहर के सबसे आखरी छोर पर रहते थे, उस जगह से जंगल मात्र 15 मीटर की दूरी पर थी,बेटे का नाम दिनेश था,वह एक लकड़ी का कारीगर था,,,, मगर उसे कामकाज में ज्यादा मन नहीं लगता,  दिनेश के पिता का लकड़ी का व्यापार था.... बड़े बड़े पेड़ों को काटकर लकड़ियां बनाई जाती और लकड़ियों से मेज कुर्सियां इत्यादि बनाई जाती,  दंपति जब अपने बुढ़ापे के आखिरी दिनों में था तो उसने अपने नालायक बेटे को बुलाकर अपनी पूरी जिम्मेदारी उसे सौप दी, क्योंकि उसके पास इसके अलावा और कोई चारा नहीं था उसका एक ही बेटा था मगर उसपर उसे भरोसा कम था इसलिए अब तक उसने अपनी जिम्मेदारियों से नहीं दी थी नाही अपने कामकाज में उसे शामिल किया था क्योंकि पिता को लगता था कि मेरा बेटा बिल्कुल नालायक है और वह यह सब काम नहीं कर सकता,  परंतु आप अपने आखिरी दिनों में जब उसने अपने बेटे को बुलाकर सारी जिम्मेदारी सौंपी,,, तब उसे उम्मीद थी कि वह सब बर्बाद कर देगा,  क्योंकि इससे पहले उसने कोई कामकाज सही से नहीं किया था, इस कारण पिता और बेटे की अच्छी न...

Bandar-ki-sujhbujh : बंदर की सूझबूझ

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पढ़े कैसे बचाई बंदर नें अपनी जान एक बार एक जंगल मे एक बंदर का परिवार रहता था........जंगल मे हर चीज उपलब्ध थे, मगर बंदरो के लिए कई सारी चीजों की मनाही थी,सारे बंदर एक तालाब के ठीक सामने वाले पेद पर रहते थे,,,और उस तालाब मे ढेर सारे मगरमछ रहते थे, अगर गलती से कोई बंदर निचे रह जाता तो मगर उन्हें अपना निवाला बना लेता, बंदर की माँ नें अपने बच्चे क़ो बताया की आज तुम्हारा जन्मदिन है.....बंदर बहोत खुश हूआ, उत्साह के कारन वह तालाब के सामने केले और संतरे के गाछ से फल तोड़ने निकल पड़ा, उसे लगा वह आज उसका जन्मदिन है मगरमछ उसका कोई नुकसान नहीँ करेंगे, वह लगातार संटर और केले खाता रहा, बंदर की थी मुश्किल मे जान निचे तालाब मे पड़े मगरमछ उसे क़िसा करते देख रहे थे, और इंतजार मे थे की जैसे हीं वह बंदर निचे आये तो मै उसको अपना निवाला बना लू, बंदर का पेट पुरी तरह भर गया.....उसे आराम की जरूरत थी,मगर सबसे बड़ी मुसीबत थी मगरमछ से भरे तालाब क़ो लाँघने की, इधर से उसके परिवार के सभी सदस्य उसे हीं देख रहे थे की कैसे वह वापस आएगा,और अपनी आवाज मे जोर जोर से चित्कार कर रहे थे,,,,, बंदर की साँस अटकी पड़ी थी,खाने का तो...

Bandar-ki-sujhbujh : बंदर की सूझबूझ

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पढ़े कैसे बचाई बंदर नें अपनी जान एक बार एक जंगल मे एक बंदर का परिवार रहता था........जंगल मे हर चीज उपलब्ध थे, मगर बंदरो के लिए कई सारी चीजों की मनाही थी,सारे बंदर एक तालाब के ठीक सामने वाले पेद पर रहते थे,,,और उस तालाब मे ढेर सारे मगरमछ रहते थे, अगर गलती से कोई बंदर निचे रह जाता तो मगर उन्हें अपना निवाला बना लेता, बंदर की माँ नें अपने बच्चे क़ो बताया की आज तुम्हारा जन्मदिन है.....बंदर बहोत खुश हूआ, उत्साह के कारन वह तालाब के सामने केले और संतरे के गाछ से फल तोड़ने निकल पड़ा, उसे लगा वह आज उसका जन्मदिन है मगरमछ उसका कोई नुकसान नहीँ करेंगे, वह लगातार संटर और केले खाता रहा, बंदर की थी मुश्किल मे जान निचे तालाब मे पड़े मगरमछ उसे क़िसा करते देख रहे थे, और इंतजार मे थे की जैसे हीं वह बंदर निचे आये तो मै उसको अपना निवाला बना लू, बंदर का पेट पुरी तरह भर गया.....उसे आराम की जरूरत थी,मगर सबसे बड़ी मुसीबत थी मगरमछ से भरे तालाब क़ो लाँघने की, इधर से उसके परिवार के सभी सदस्य उसे हीं देख रहे थे की कैसे वह वापस आएगा,और अपनी आवाज मे जोर जोर से चित्कार कर रहे थे,,,,, बंदर की साँस अटकी पड़ी थी,खाने क...

hanso-ka-joda-or-saanp : हंसो का जोड़ा और साँप

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मेरा नाम है सरोजनी और मेरा घर यही दिल्ली मे है,हमारे घर से सटा एक तालाब हुआ करता था, तालाब मे बहुत सारी मछलियां होती थी, जो दिन भर पानी की स्थ पर तैरती रहती, पानी के अंदर शैवाल भरे थे इसलिए कुछ खाश साफ नहीँ दीखता, लोग वहां दिन भर मछलिया पकड़ते, एक दिन मैंने देखा की उस बड़े से तालाब मे दो हंस तैर रहे थे, हाँसो का जोड़ा देखने मे बिल्कुल सफ़ेद और सुंदर था, वही बगल मे एक बड़ा मोटा साँप भी उन हाँसो क़ो गौर से एकटक देखे जा रहा था, जैसे केह रहा हो... तुम दोनों यहां क्या कर रहे हो,ये तो मेरा इलाका है, पर दोनों हंसो क़ो उसके अंदाज से कोई ख़ास फर्क नहीँ पड़ा, वह बार बार हंसो के करीब से गुजर कर अपनी मौजूदगी जताने मे लगा था, मगर हँस अपनी अटखेलियों मे ब्यस्त थे, की तभी उधर से किसी नें मछलियों क़ो पकड़ने के लिए एक बड़ी सि जलन पानी मे फेंका, साँप हंसो और ध्यान केंद्रित किये हुए था इसलिए वह उस जाल मे मछलियों के साथ जा फसा, जबकि दोनों हँस उसी तालाब मे बड़े आराम से तैर रहे थे, मछलियों क़ो निकलने के लिए ज़ब मछुवारो नें जाल फ खोला , तब वह साँप भी उसमे मछलियों के साथ मिला, उन्हें मछवारो नें हाथ मे लेकर दू...

hanso-ka-joda-or-saanp : हंसो का जोड़ा और साँप

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मेरा नाम है सरोजनी और मेरा घर यही दिल्ली मे है,हमारे घर से सटा एक तालाब हुआ करता था, तालाब मे बहुत सारी मछलियां होती थी, जो दिन भर पानी की स्थ पर तैरती रहती, पानी के अंदर शैवाल भरे थे इसलिए कुछ खाश साफ नहीँ दीखता, लोग वहां दिन भर मछलिया पकड़ते, एक दिन मैंने देखा की उस बड़े से तालाब मे दो हंस तैर रहे थे, हाँसो का जोड़ा देखने मे बिल्कुल सफ़ेद और सुंदर था, वही बगल मे एक बड़ा मोटा साँप भी उन हाँसो क़ो गौर से एकटक देखे जा रहा था, जैसे केह रहा हो... तुम दोनों यहां क्या कर रहे हो,ये तो मेरा इलाका है, पर दोनों हंसो क़ो उसके अंदाज से कोई ख़ास फर्क नहीँ पड़ा, वह बार बार हंसो के करीब से गुजर कर अपनी मौजूदगी जताने मे लगा था, मगर हँस अपनी अटखेलियों मे ब्यस्त थे, की तभी उधर से किसी नें मछलियों क़ो पकड़ने के लिए एक बड़ी सि जलन पानी मे फेंका, साँप हंसो और ध्यान केंद्रित किये हुए था इसलिए वह उस जाल मे मछलियों के साथ जा फसा, जबकि दोनों हँस उसी तालाब मे बड़े आराम से तैर रहे थे, मछलियों क़ो निकलने के लिए ज़ब मछुवारो नें जाल फ खोला , तब वह साँप भी उसमे मछलियों के साथ मिला, उन्हें मछवारो नें हाथ मे...

Jiraf-Ne-bachayi-do-jaan : कहानी पढ़े कैसे एक जिराफ ने शेर के मुंह से दो जानों को बचाया

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एक बार की बात है एक घने जंगल में एक बड़ा सा शेर रहता था, वाह शेर बहुत खतरनाक था, सारे जानवरों पर अपनी निगाह रख कर तूने एक दिन अपना निवाला बना लेता था, जंगल में शेर का बहुत आतंक मचा हुआ था,  कोई उस शेर के कारण हुआ जंगल छोड़कर दूसरे जंगल जा रहा था,  एक बार उससे ने एक बड़े से जिराफ को जंगल से बाहर जाते देखा, वजीराम बहुत दुखी था उसके साथ एक छोटा जिराफ भी था, फिर शेर को समझते हुए बिल्कुल देर नहीं लगा कि वह छोटा सा जिला उस बड़े जिराफ का बच्चा है,  वह शेर अब उस छोटे जीरा को खाने की तैयारी में था, जिराफ इन सब चीजों से अनजान अपनी धुन में मगन हुए जंगल से बाहर की ओर जा रहा था, रास्ते में जो डालियां उसके नजदीक आती वह उन्हें चलाता हुआ कुछ अपने बच्चे को देता हुआ जाता रहा,  तभी उसके सामने अचानक बसेरा खड़ा हुआ, फिर उस से मात्र 10 मीटर की दूरी पर था, जी रात में शेर को देखकर गहरी सांस भरी, उसे बस अपने बच्चे की चिंता थी, डर से उसके अंदर कई तरह के भागने के रास्ते दिखने लगे,  अब वह अकेला तू नहीं भाग सकता था उसे सबसे पहले अपने बच्चे को भगाना था तब वह शेर से हाथापाई करके थोड़ी...

Jiraf-Ne-bachayi-do-jaan : कहानी पढ़े कैसे एक जिराफ ने शेर के मुंह से दो जानों को बचाया

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एक बार की बात है एक घने जंगल में एक बड़ा सा शेर रहता था, वाह शेर बहुत खतरनाक था, सारे जानवरों पर अपनी निगाह रख कर तूने एक दिन अपना निवाला बना लेता था, जंगल में शेर का बहुत आतंक मचा हुआ था,  कोई उस शेर के कारण हुआ जंगल छोड़कर दूसरे जंगल जा रहा था,  एक बार उससे ने एक बड़े से जिराफ को जंगल से बाहर जाते देखा, वजीराम बहुत दुखी था उसके साथ एक छोटा जिराफ भी था, फिर शेर को समझते हुए बिल्कुल देर नहीं लगा कि वह छोटा सा जिला उस बड़े जिराफ का बच्चा है,  वह शेर अब उस छोटे जीरा को खाने की तैयारी में था, जिराफ इन सब चीजों से अनजान अपनी धुन में मगन हुए जंगल से बाहर की ओर जा रहा था, रास्ते में जो डालियां उसके नजदीक आती वह उन्हें चलाता हुआ कुछ अपने बच्चे को देता हुआ जाता रहा,  तभी उसके सामने अचानक बसेरा खड़ा हुआ, फिर उस से मात्र 10 मीटर की दूरी पर था, जी रात में शेर को देखकर गहरी सांस भरी, उसे बस अपने बच्चे की चिंता थी, डर से उसके अंदर कई तरह के भागने के रास्ते दिखने लगे,  अब वह अकेला तू नहीं भाग सकता था उसे सबसे पहले अपने बच्चे को भगाना था तब वह शेर से हाथापाई करके थ...

ek-gaay-or-uske-pariwar-ki-kahani : पढ़े कैसे वह गाय कैसे वापस अपने परिवार में आई?

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एक गाय और उसके परिवार की कहानी :- यह कहानी एक गाय की है जो अपने परिवार में खुशहाल थी..... मगर एक फैसले से गाय और उसके मालिक दोनों की जिंदगी बदल गई  कहानी :- एक धनी परिवार में एक प्यारी सी गाय रहती थी वह गाय बिल्कुल सफेद और बहुत सुंदर थी, वह एक गाय की चौथी पीढ़ी थी जो इस परिवार को पालने भी दूध देकर,  गाय की आंखें बिल्कुल काली थी जिसे देखने से हर कोई लुभा जाता,  वह गाय सबकी लाडली थी और हर कोई उसके द्वारा दी गई दूध के मीठे स्वाद से वाकिफ था,  एक बार बार गाय बहुत बीमार पड़ गई, बहुत जांच पड़ताल करने के बाद भी असल बीमारी सामने नहीं आए तब किसी ने बताया कि वह एक प्लास्टिक निकल रही थी,,,,  इसके बाद उस गाय की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही थी, इसलिए लोगों ने गांव के बाहर से डॉक्टर बुलाया, जो की खास जानवरों के डॉक्टर थे,,,,,,,,,,,,,,, गाय के पेट के बीचो बीच के हिस्से में एक छोटा सा छेद किया गया और वहां से अंदर हाथ देखकर उस प्लास्टिक को उसके शरीर में अटके पड़े जगह से निकाला गया, तब जाकर कहीं वह गाय ठीक हो सकी,  इसके बाद घर में गाय की सेवा कर कर के लोग थक चु...

ek-gaay-or-uske-pariwar-ki-kahani : पढ़े कैसे वह गाय कैसे वापस अपने परिवार में आई?

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एक गाय और उसके परिवार की कहानी :- यह कहानी एक गाय की है जो अपने परिवार में खुशहाल थी..... मगर एक फैसले से गाय और उसके मालिक दोनों की जिंदगी बदल गई  कहानी :- एक धनी परिवार में एक प्यारी सी गाय रहती थी वह गाय बिल्कुल सफेद और बहुत सुंदर थी, वह एक गाय की चौथी पीढ़ी थी जो इस परिवार को पालने भी दूध देकर,  गाय की आंखें बिल्कुल काली थी जिसे देखने से हर कोई लुभा जाता,  वह गाय सबकी लाडली थी और हर कोई उसके द्वारा दी गई दूध के मीठे स्वाद से वाकिफ था,  एक बार बार गाय बहुत बीमार पड़ गई, बहुत जांच पड़ताल करने के बाद भी असल बीमारी सामने नहीं आए तब किसी ने बताया कि वह एक प्लास्टिक निकल रही थी,,,,  इसके बाद उस गाय की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही थी, इसलिए लोगों ने गांव के बाहर से डॉक्टर बुलाया, जो की खास जानवरों के डॉक्टर थे,,,,,,,,,,,,,,, गाय के पेट के बीचो बीच के हिस्से में एक छोटा सा छेद किया गया और वहां से अंदर हाथ देखकर उस प्लास्टिक को उसके शरीर में अटके पड़े जगह से निकाला गया, तब जाकर कहीं वह गाय ठीक हो सकी,  इसके बाद घर में गाय की सेवा कर कर के लोग थ...

natkhat-bandr : पढ़े नटखट बंदर कैसे सभी जानवरों को परेशान करता था

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एक बंदर हमेशा एक आम के बड़े से पेड़ पर चढ़कर बैठा रहता था, बंदर हर दिन पेड़ से फल तोड़कर खाता और वही आम तोड़कर ओरो क़ो मारता, वह बंदर बहुत शरारती और बहुत नटखट था,  आने जाने वाले जानवरों को फल तोड़कर मारते रहने के कारन सभी जानवरो उससे परेशान रहते,उससे करता था, जिस कारण सभी उसकी नटखट से परेशान रहते थे,  एक बार वह गलती से एक फल जंगल में रहने वाले शेर को मार दिया, अब वह शेर उसकी जान का प्यासा बन गया वह शेर जब भी हद से गुजरता एक बार उसे खाने की कोशिश जरूर करता पर वह बंदर पेड़ की डालियों से लपक लपक कर भाग जाता,  एक बार जब वह शेर उधर से जा रहा था तो उस बंदर को वहां बैठा पाया और उसे दबोच लिया और बोला क्यों बच्चे आ गए ना मेरी मुट्ठी में,  वह बंदऱ अब अपनी जान छुड़ाने के लिए शेर से माफी मांगने लगा,मगर और शेर ने उसे नहीं छोड़ा उधर से आते जाते कई जानवरों ने उसे देखा और उसे बचाने की भी कोशिश नहीं की, क्योंकि वह जानता है कि वह बंदर बहुत नटखट है वह सभी को परेशान करता रहता था,इसलिए उसकी मदद किसी नें नहीँ की , शेर बंदर को अपनी गुफा में ले गया और गुफा में बस खाने वाला था क...

natkhat-bandr : पढ़े नटखट बंदर कैसे सभी जानवरों को परेशान करता था

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एक बंदर हमेशा एक आम के बड़े से पेड़ पर चढ़कर बैठा रहता था, बंदर हर दिन पेड़ से फल तोड़कर खाता और वही आम तोड़कर ओरो क़ो मारता, वह बंदर बहुत शरारती और बहुत नटखट था,  आने जाने वाले जानवरों को फल तोड़कर मारते रहने के कारन सभी जानवरो उससे परेशान रहते,उससे करता था, जिस कारण सभी उसकी नटखट से परेशान रहते थे,  एक बार वह गलती से एक फल जंगल में रहने वाले शेर को मार दिया, अब वह शेर उसकी जान का प्यासा बन गया वह शेर जब भी हद से गुजरता एक बार उसे खाने की कोशिश जरूर करता पर वह बंदर पेड़ की डालियों से लपक लपक कर भाग जाता,  एक बार जब वह शेर उधर से जा रहा था तो उस बंदर को वहां बैठा पाया और उसे दबोच लिया और बोला क्यों बच्चे आ गए ना मेरी मुट्ठी में,  वह बंदऱ अब अपनी जान छुड़ाने के लिए शेर से माफी मांगने लगा,मगर और शेर ने उसे नहीं छोड़ा उधर से आते जाते कई जानवरों ने उसे देखा और उसे बचाने की भी कोशिश नहीं की, क्योंकि वह जानता है कि वह बंदर बहुत नटखट है वह सभी को परेशान करता रहता था,इसलिए उसकी मदद किसी नें नहीँ की , शेर बंदर को अपनी गुफा में ले गया और गुफा में बस खाने व...

ek-chuhe-or-ek-sher-ki-kahani : एक शेर और एक चूहे की कहानी

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एक जंगल में एक लायन रहता था लायन बहुत खुखार था, लायन राजा था, और छोटे जानवरों को बिल्कुल नहीं करता था, और सब को अपने से छोटा समझता था,  एक बार जब वह सो रहा था तो एक छोटा सा मां उसके कानों के पास खेल रहा था, वह सोते हुए वह सोते हुए शेर को अपनी शरारती से जगा दिया, तब लायन उठा और छोटे से चूहे को देखकर बहुत गुस्सा हो गया, उसने कहा तुमने मेरे कानों में गुदगुदी के जिसके कारण मैं नींद से जाग गया अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा तुम छोटू माउस होकर मुझसे शेर से पंगा लेते हो,  लायन ने चूहे से कहा तुमने मुझे परेशान कर दिया अब मैं तुम्हें खा जाऊंगा अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा मैं तुम्हें खा कर ही रहूंगा,  चूहा बुरी तरह से डर गया और थरथर कांपने लगा बोला नहीं हो झूठ नहीं हुजूर मुझे छोड़ दीजिए मैं आपकी मदद कर दूंगा कभी ना कभी, मुझे माफ कर दीजिए मैं कभी ना कभी आपके काम आ जाऊंगा मुझे आज मेरी गलती के लिए क्षमा कर दीजिए,  लायन बोला तुम भला मेरे किस काम के मैं तुमसे क्यों मदद हूं तुम अपना आकार देखो और मेरा आकर देखो क्या मैं तुम्हारी मदद के काबिल हूं तुम भला तुच्छ जीव मेरी क्या मदद कर...

ek-chuhe-or-ek-sher-ki-kahani : एक शेर और एक चूहे की कहानी

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एक जंगल में एक लायन रहता था लायन बहुत खुखार था, लायन राजा था, और छोटे जानवरों को बिल्कुल नहीं करता था, और सब को अपने से छोटा समझता था,  एक बार जब वह सो रहा था तो एक छोटा सा मां उसके कानों के पास खेल रहा था, वह सोते हुए वह सोते हुए शेर को अपनी शरारती से जगा दिया, तब लायन उठा और छोटे से चूहे को देखकर बहुत गुस्सा हो गया, उसने कहा तुमने मेरे कानों में गुदगुदी के जिसके कारण मैं नींद से जाग गया अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा तुम छोटू माउस होकर मुझसे शेर से पंगा लेते हो,  लायन ने चूहे से कहा तुमने मुझे परेशान कर दिया अब मैं तुम्हें खा जाऊंगा अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा मैं तुम्हें खा कर ही रहूंगा,  चूहा बुरी तरह से डर गया और थरथर कांपने लगा बोला नहीं हो झूठ नहीं हुजूर मुझे छोड़ दीजिए मैं आपकी मदद कर दूंगा कभी ना कभी, मुझे माफ कर दीजिए मैं कभी ना कभी आपके काम आ जाऊंगा मुझे आज मेरी गलती के लिए क्षमा कर दीजिए,  लायन बोला तुम भला मेरे किस काम के मैं तुमसे क्यों मदद हूं तुम अपना आकार देखो और मेरा आकर देखो क्या मैं तुम्हारी मदद के काबिल हूं तुम भला तुच्छ जीव मेरी क्या मद...

Do-Jiraf-or-Darban : पढ़े दरबान ने कैसे दो जीराफो की जान बचाई

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उत्तर प्रदेश के विंध्यायन जंगल मे कड़ाके की ठंड थी, औऱ यहां का ठंड इतना भयावह था, 24 घंटे में दिन और रात बराबर लग रहे थे, मतलब यह कि कोहरे ने इस कदर ढका हुआ था वहां का इलाका की भरी दोपहर में भी कुछ भी नजर नहीं आ रहा था,  वहां के पक्षियों से लेकर जीव जानवर सब त्राहि त्राहि कर रहे थे, खाने पीने का कोई ठीक नहीं था, ठंड के मौसम में भी जानवरों को खाने पीने की जरूरत पड़ती है, मांसाहारी जानवरों को तो कई दिनों से शिकार मिला ही नहीं, और शाकाहारी जानवर आसपास थोड़े बहुत घास खा कर अपना गुजारा कर रहे थे,  उन्ही जानवरों में दो बड़े-बड़े जिराफ थे, जिन्होंने विश्व 25 दिनों से ढंग से पेट भर पत्तीया भी नहीं खाया, ठंड के मारे उन्होंने आसपास ही पड़े थोड़ी बहुत घास खाकर अपना गुजारा कर लिया,  दोनों जिराफ में काफी गहरी दोस्ती थी, एक जो भी काम करता है दूसरा भी वही काम करता, ठंड के मारे दोनों कई दिनों तक जंगल की सैर सपाटे के लिए भी नहीं निकले, दोनों अपने अड्डे पर बैठकर थोड़ी बहुत दाना दाना खाकर कई दिनों से पड़े रहते रहते अब बोर हो गए थे,  इसलिए 1 दिन एक जिराफ ने कहा मुझे बड़ी...

Do-Jiraf-or-Darban : पढ़े दरबान ने कैसे दो जीराफो की जान बचाई

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उत्तर प्रदेश के विंध्यायन जंगल मे कड़ाके की ठंड थी, औऱ यहां का ठंड इतना भयावह था, 24 घंटे में दिन और रात बराबर लग रहे थे, मतलब यह कि कोहरे ने इस कदर ढका हुआ था वहां का इलाका की भरी दोपहर में भी कुछ भी नजर नहीं आ रहा था,  वहां के पक्षियों से लेकर जीव जानवर सब त्राहि त्राहि कर रहे थे, खाने पीने का कोई ठीक नहीं था, ठंड के मौसम में भी जानवरों को खाने पीने की जरूरत पड़ती है, मांसाहारी जानवरों को तो कई दिनों से शिकार मिला ही नहीं, और शाकाहारी जानवर आसपास थोड़े बहुत घास खा कर अपना गुजारा कर रहे थे,  उन्ही जानवरों में दो बड़े-बड़े जिराफ थे, जिन्होंने विश्व 25 दिनों से ढंग से पेट भर पत्तीया भी नहीं खाया, ठंड के मारे उन्होंने आसपास ही पड़े थोड़ी बहुत घास खाकर अपना गुजारा कर लिया,  दोनों जिराफ में काफी गहरी दोस्ती थी, एक जो भी काम करता है दूसरा भी वही काम करता, ठंड के मारे दोनों कई दिनों तक जंगल की सैर सपाटे के लिए भी नहीं निकले, दोनों अपने अड्डे पर बैठकर थोड़ी बहुत दाना दाना खाकर कई दिनों से पड़े रहते रहते अब बोर हो गए थे,  इसलिए 1 दिन एक जिराफ ने कहा म...

unity-of-strength : English story off Unity for children : A llesson of Unity

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There was small family lives in a village, father's name is Dindayal and he has three son,  Ramu, Shyamu, Dipu. They always fight each other, I never respect his Unity,  That's the reason Mr Dindayal always tensed because of son's. One day Dindayal has an idea......... To taught his all son unity of strength, A bundle of sticks and old man was about to die so he called his four son and ask it one of the to bring to stick when his son where in front of him he told them to break  When his son where in front of him he told in to break one of the stick they were holding on the sudden why easily broke single stick  Then he took the remaining stick from all his son and made a bundle of boasting he then told his son to break that bundle all the centroid but they couldn't break it the personal the father said stay together and no one will be able to defeat you  Does the father out everyone a big lesson of life, father with brothers become very lo...

unity-of-strength : English story off Unity for children : A llesson of Unity

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There was small family lives in a village, father's name is Dindayal and he has three son,  Ramu, Shyamu, Dipu. They always fight each other, I never respect his Unity,  That's the reason Mr Dindayal always tensed because of son's. One day Dindayal has an idea......... To taught his all son unity of strength, A bundle of sticks and old man was about to die so he called his four son and ask it one of the to bring to stick when his son where in front of him he told them to break  When his son where in front of him he told in to break one of the stick they were holding on the sudden why easily broke single stick  Then he took the remaining stick from all his son and made a bundle of boasting he then told his son to break that bundle all the centroid but they couldn't break it the personal the father said stay together and no one will be able to defeat you  Does the father out everyone a big lesson of life, father with brothers be...

Gillu-ne-pani-me-tairna-sikha : पानी में गिरते पड़ते गिल्लू ने तैरना सिखा : मेंढक की सीख

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एक बार की बात है, एक छोटा सा मेंढक पानी में जाने से डरता था, मेरठ की मम्मा ने सिखाया कि चलो बेटा पानी में तैरना तुम्हें आना चाहिए,  मगर वह मेरा पानी से इतना डरता था पानी को देखते ही दूर हट जाता, बारिश के महीने बिल्कुल पसंद नहीं थी उसे, पानी के आसपास से भी गुजर ना हुआ जरूरी नहीं समझता, उसे पानी देख कर ऐसा लगता जैसे कहीं मैं इसमें डूब ना जाऊं,  मां उसे बार-बार समझाती पानी में चलो बेटा हम पानी में रहने वाले जीव हैं, मगर वह मीठा बिल्कुल मां की बात नहीं मानता, पर वह सिर्फ जमीन पर ही चलना चाहता,  उस छोटे मेंढक का नाम था गिल्लू, उसी के उम्र के बहुत सारे मेंढक उसके दोस्त है,  बारिश के महीने के 1 दिन बहुत बारिश हुई और उस दिन जमीन का कोई हिस्सा का नहीं रहा जहां पानी ना जमा हो, गिल्लू एक कोने में एक पत्ते के सहारे दुख का बैठा रहा, फिर भी वह पानी में जाने की हिम्मत  नहीं कर पाया,  जबकि गिल्लू के बाकी सारे दोस्त पानी में आराम से तैर रहे थे, यह देख गिल्लू मन ही मन पानी को लेकर डर शर्मिंदा हो रहा था,  लेकिन अब उसके पास कोई उपाय नहीं था क्योंकि पानी मे...

Gillu-ne-pani-me-tairna-sikha : पानी में गिरते पड़ते गिल्लू ने तैरना सिखा : मेंढक की सीख

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एक बार की बात है, एक छोटा सा मेंढक पानी में जाने से डरता था, मेरठ की मम्मा ने सिखाया कि चलो बेटा पानी में तैरना तुम्हें आना चाहिए,  मगर वह मेरा पानी से इतना डरता था पानी को देखते ही दूर हट जाता, बारिश के महीने बिल्कुल पसंद नहीं थी उसे, पानी के आसपास से भी गुजर ना हुआ जरूरी नहीं समझता, उसे पानी देख कर ऐसा लगता जैसे कहीं मैं इसमें डूब ना जाऊं,  मां उसे बार-बार समझाती पानी में चलो बेटा हम पानी में रहने वाले जीव हैं, मगर वह मीठा बिल्कुल मां की बात नहीं मानता, पर वह सिर्फ जमीन पर ही चलना चाहता,  उस छोटे मेंढक का नाम था गिल्लू, उसी के उम्र के बहुत सारे मेंढक उसके दोस्त है,  बारिश के महीने के 1 दिन बहुत बारिश हुई और उस दिन जमीन का कोई हिस्सा का नहीं रहा जहां पानी ना जमा हो, गिल्लू एक कोने में एक पत्ते के सहारे दुख का बैठा रहा, फिर भी वह पानी में जाने की हिम्मत  नहीं कर पाया,  जबकि गिल्लू के बाकी सारे दोस्त पानी में आराम से तैर रहे थे, यह देख गिल्लू मन ही मन पानी को लेकर डर शर्मिंदा हो रहा था,  लेकिन अब उसके पास कोई उपाय नहीं था क्योंकि...